गुरुवार, दिसंबर 19, 2013

बेहरूपिये सो रहें हैं-------

                       समर्थक परजीवी हो रहें हैं
                       सड़क पर कोलाहल बो रहें हैं----

                       शिकायतें द्वार पर टांग कर
                       हस्ताक्षर सलीके से रो रहें हैं----
 
                       जश्न में डूबा समय अब मौन है
                       थैलियां आश्वासन की खो रहें हैं----
 
                       चौखटों के पांव पड़ते थक गऐ
                       भदरंगे बेहरूपिये सो रहें हैं----
 
                       घाट पर धुलने गई है व्यवस्था
                       आँख से बलात्कार हो रहें हैं----


                                                      "ज्योति खरे"

 

22 टिप्‍पणियां:

Vaanbhatt ने कहा…

सुन्दर ग़ज़ल...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (20-12-13) को "पहाड़ों का मौसम" (चर्चा मंच:अंक-1467) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Reena Maurya ने कहा…

समसामयिक गजल…
बहुत बढ़ियाँ...

Ranjana Verma ने कहा…

मौजूदा समय पर कटाक्ष करते हुए कविता... बहुत सुंदर....

रविकर ने कहा…

बढ़िया है आदरणीय-
आभार आपका-

Vikesh Badola ने कहा…

बहुत बढ़िया है।

आशीष भाई ने कहा…

आ० बहुत ही सुंदर कृति व प्रस्तुति , धन्यवाद

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

वाह ! बहुत खूब सुंदर गजल,भावपूर्ण पंक्तियाँ ...!
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RECENT POST -: हम पंछी थे एक डाल के.

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर !

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत बढिया..आभार

Yashwant Yash ने कहा…

कल 22/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत बढ़िया सामयिक रचना !
नई पोस्ट चाँदनी रात
नई पोस्ट मेरे सपनों का रामराज्य ( भाग २ )

Kaushal Lal ने कहा…

बहुत बढिया......

Digamber Naswa ने कहा…

बहुत खूब ... गहरा आक्रोश छलक रहा है ... व्यवस्था के प्रति सटीक टीका ...

dr.mahendrag ने कहा…

घाट पर धुलने गई है व्यवस्था
आँख से बलात्कार हो रहें हैं----
sundar prastuti.

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है

Narendra Parihar ने कहा…

kaya baat hai sir ji behroopiye so rahe ...... choukhato ke paon thak gaye........ umda sher va behatreen gajal

jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

ANITA SHARMA ने कहा…

Bahut sundar abhivykti .......